माँ की आँखों का नूरपिता का गुरूर होती है बेटीघर की शान और अभिमान होती है बेटीफ़ूलों की पंखुड़ी सी नाजुकओस सी पावन होती है बेटीधरती पर ईशवर का दियाअनमोल वरदान होती है बेटीनर्म,नाजुक,कोमल भावनाओंका कल-कल बहता झरना होती है बेटीदो परिवारों को प्यार की ड़ोरसे बाँधती है बेटीखुश-नसीब होते है वो जहाँजन्म लेती है बेटीमाँ की आँखों का नूर पिता का गुरूर होती है बेटी...राधा श्रोत्रिय"आशा"
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