शुक्रवार, 28 मार्च 2014

"स्पर्श"

एक स्पर्श ,

जो नव जीवन दे गया !


ना तुमने कुछ कहा,


हम भी चुप ही रहे !


मन से मन मिल गया 

,
यूँ लगा आत्मा परमात्मा,


में विलीन हो गयी !


...राधा श्रोत्रिय"आशा"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें