#*****# ख्याल #*****#
जब भी कोई,
ख्याल,
दिल में आता है!
तुम्हारे होने का ,
एहसास जगाता है!
उस एहसास को हम ,
लम्हों के धागों में ,
ढ़ालकर,
वक्त की सलाईयों में,
पिरो लेते है!
और अपनी पलकों पे,
ख्बाब की तरह,
हर लम्हें को,
सहेजते हें!
कि कहीं कोई लम्हा,
छूट न जाये!
लम्हों के धागों को ,
बडे जतन से
सहेजकर,
लम्हा- लम्हा बुनते हें!
आपस में,
कहीं, उलझ न जाये!
इन्हें ,
सुलझाना आसां नही!
जरा सा हाथ,
क्या फिसला
पारे के ,
माफ़िक बिखर जाते हें!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
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