शनिवार, 24 मई 2014

ख्याल

#*****# ख्याल #*****# जब भी कोई, ख्याल, दिल में आता है! तुम्हारे होने का , एहसास जगाता है! उस एहसास को हम , लम्हों के धागों में , ढ़ालकर, वक्त की सलाईयों में, पिरो लेते है! और अपनी पलकों पे, ख्बाब की तरह, हर लम्हें को, सहेजते हें! कि कहीं कोई लम्हा, छूट न जाये! लम्हों के धागों को , बडे जतन से सहेजकर, लम्हा- लम्हा बुनते हें! आपस में, कहीं, उलझ न जाये! इन्हें , सुलझाना आसां नही! जरा सा हाथ, क्या फिसला पारे के , माफ़िक बिखर जाते हें! ...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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