मंगलवार, 24 जून 2014

रिश्ते

******* रिश्ते *******
 एक -एक पल बिताना,
मुश्किल हो रहा था!
खुद पर ही सवाल​,
उठाने को जी चाह​,
रहा था!
दिल से अपना मान ,
जिन रिश्तों को,
बड़ी शिद्दत से ,निभा रहे थे!
लग रहा था,कि वो अब ,
दम तोड़ रहे थे!
किसी पे राख थी 
हसरतों की,
तो किसी पे ,
आँखों से बहा लहू था! 
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

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