गुरुवार, 28 अगस्त 2014

****** जिंदगी की सिलवटें ******

****** जिंदगी की सिलवटें ******
उसकी यादों की सिलवटों में,
मन बहलाते रहे ,
हम रात भर​-----
न पता था कि ,
वो उन्हें रुसवा,
कर जायेगा ----
न तो वो आया ,
न ही कम हुई ,
जिंदगी की सिलवटें-------
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
२८-०८-२०१४http://shrotriyaradhablog.blogspot.in/

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