******** अपना दर्द********
कभी-कभी अपना दर्द भी,
किस कदर अपना हो जाता है!
कि लिपट उससे ही ,
दिल को सुकूँन आता है !
धोखा तो नहीं देता,
साथ निभाता है!
नवजात शिशु जैसा,
तन -मन से लिपट जाता है!
न पाने की लालसा रहती ,
न ही खोने का डर ,
सताता है!
रंग बदलती दुनिया में देखो,
दर्द ही न रंग बदल पाता है !
"आशा" मतलब परस्तों की,
दुनियाँ मैं देखो!
दर्द ही हमें अपना सा,
नजर आता है!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०८-०८-२०१४
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