शुक्रवार, 8 अगस्त 2014

अपना दर्द

******** अपना दर्द******** कभी-कभी अपना दर्द भी, किस कदर अपना हो जाता है! कि लिपट उससे ही , दिल को सुकूँन आता है ! धोखा तो नहीं देता, साथ निभाता है! नवजात शिशु जैसा, तन -मन से लिपट जाता है! न पाने की लालसा रहती , न ही खोने का डर , सताता है! रंग बदलती दुनिया में देखो, दर्द ही न रंग बदल पाता है ! "आशा" मतलब परस्तों की, दुनियाँ मैं देखो! दर्द ही हमें अपना सा, नजर आता है! ...राधा श्रोत्रिय"आशा" ०८-०८-२०१४

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