मंगलवार, 5 अगस्त 2014

तन्हा दिल

*******तन्हा दिल ********
आज तन्हाई में ,
दिल को,तुम्हारा ख्याल ,
आया है!
तुम्हारी चाहत ने,
 हमको, इस कदर,
 तड़पाया है!
ऊगते सूरज की
तपिश मैं भी,तुम्हें पाने की
चाहत की है!
ख्वावों में  हर रात,
तुमसे  अपने प्यार की,
 गुजारिश   की है!
कैसी बेकरारी है ये,
 तुम्हारी चाहत की ,
हम समझ नहीं पाते हैं !
तुम्हारी चाहत की
 बारिश में हम ,
भीगे चले जाते हैं!
काश की समझ पाते ,
 तुम एक बार,
 हमारी मजबूरी!
तो कभी न होती,
हमारे  तुम्हारे,
बीच ये दूरी!
मेरी पलकें तुम्हारे,
 एहसासों के,
मोती पिरोती है!
तुम्हारे ख्वावों,ख्यालों में
 अब मेरी,जिंदगी
 बसर होती है!
"आशा" जब-जब आकाश मैं
 काला बादल​ मँड़राता है!
 तुम्हें याद करके ,
दिल मेरा  बहुत​, 
घबराता है!
आज तन्हाई में ,
दिल को,तुम्हारा ख्याल ,
आया है!

...राधा श्रोत्रिय​"आशा

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