गुरुवार, 11 सितंबर 2014

********* अब आ भी जाओ ********


********* अब आ भी जाओ ********
ढ़ाल तेरी यादों को नग्मों में,
सुनते रहे !
कब दिन गुजरा,
कब रात घिर आयी,
खबर नहीं ------
और गहराई तुम्हारी याद​,
बेबस हो मन के हाथों,
टहलते रहे यहाँ वहाँ!
नाकाम रहे--------
दिल दिमाग पर हावी रहा,
ले साथ ख्वावो में ,
तेरी यादों का कारवाँ,
निकल पडे--------
दूर सबकी निगाहों से,
हम दोनो की रूहें,
एक हो जायें,
बुनते रहे हर पल हर लम्हा,
ख्वावों की ताबीर​--------
पर यादों का बंबडर ,
मन की नदिया में,
मचल पडा!
नाकाम रही रोकने की,
कोई बाँध नहीं ,हर कोशिश​---------
जो रोक सके इसे!
आखिर फूट ही पडे ,
यादों के झरने!
प्रेम जल भी पावन होता है,
कोई मिलावट नहीं---------
मन की गहराईयों से निकलता है,
नयन सजल हो,
ख्वावों से बाहर आ गये!
तुम तो नहीं थे साथ,
पर तुम्हारी चाहत का रंग​,
उतर आया था!
हमारे चेहरे पर​---------
तन मन को भिगो लिया,
तुम्हारी चाहत की ,
बारिश में!
मिट गये गिले शिकवे सारे,
एक एहसास तुम हो साथ​--------
मेरा तो कुछ रहा नहीं शेष​,
रूह से रूह मिल ,
हो गयी एक​!
पर आँखों को करार कहाँ,
धुल चाहत के जल से,
बेकरार हो उठी-------
तुम्हे देखने की तडप ,
और बढ़ गयी!
अब आ भी जाओ तुम ,
कि मेरी साँसें अब थमने सी लगी हैं-------
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
१२-०९-२०१४http://shrotriyaradhablog.blogspot.in/

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