बुधवार, 5 नवंबर 2014

तुम्हारे चेहरे की ,मासुमियत पर, मर मिटे हम​,
वरना आशिकों की ,कमीं न थी ,हमें जमाने में!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

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