सोमवार, 15 दिसंबर 2014

******** बचपन की मोहब्बत ************
बचपन
की मोहब्बत,
ऊगते
सूर्य कि भाँति
कितनी सुकोमल,
भौंर की पहली
किरण
की तरह,
रोशन और पावन !
सुबह की पहली,
धूप की तरह
नर्म
और गुन गुनी!
सुबह की मद-मस्त,
बयार की तरह,
ताजी!
एक खूबसूरत से,
एहसास की तरह ,
कभी न
भूलनेवाली!
बचपन
की मोहब्बत!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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