सोमवार, 2 फ़रवरी 2015

बेटियाँ

********बेटियाँ ****************
दुआओं सी मासूम,ओर फूलों जैसी,
 कोमल होती हैं बेटियाँ !
तितली के पंखों सी,नाजुक,
 रंगबिरंगी रंगोली सी ,
पवित्र होती हैं बेटियाँ!
शोख,चंचल,परियों जैसी ,
सपनों में रंग भरती हैं बेटियाँ!
खुशियों की फुलवारी सी,
घर आँगन की शोभा,
बढाती हैं  बेटियाँ!
सात सुरों की मधुर​ सरगम​,
वेदों की ऋचाओं सी होती हैं बेटियाँ!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
०२-०२-२०१५ 

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