गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

-------------ज्ञान की जननी-----------


तुम हो ज्ञान की जननी
माता
मेरे अंतस को उज्जवल
कर दो
दूर भगाकर अंधकार
को
प्रेम भाव ह्रदय मैं भर
दो
कोई छोटा न कोई बड़ा
रहे
हर जन मैं सम भाव
रहै
कृपा करो है ज्ञान की
जननी
मेरे अंतस को निर्मल
कर दो
दूर हों विकार सारे
मन​
छल कपट रहित कर
दो
दुनियाँ के हर इसाँन मैं
माँ
मुझको तुम्हारा ही दर्शन
हो
स्वार्थ से अपने ऊपर
उठकर​
अनुभव औरों की पीड़ा
हो
कुछ नाम मैं कर पाऊँ जग​
मैं
माँ तुम ऐसी बुद्धी का वर​
दो
अपने ज्ञान का  आशीष​
देकर
मेरा ये जीवन धन्य कर
 दो
तुम हो ज्ञान की जननी
माता
मेरे अंतस को उज्जवल
कर दो
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

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