शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

--------------नया -सबेरा---------------


दुनियाँ मेरी तुमसे साजन 
जीवन का आधार है तुमसे
प्रीत है तुमसे प्यार है तुमसे
जीवन का श्रंगार भी तुमसे 
होती क्या है कशिश चाहत की
तुमने ही सिखलाया है
तुमसे मिलकर ही जीवन मैं 
नया सवेरा आया है
बगिया महक उठी है मन की
जब प्यार तुम्हारा पाया है
तुमसे मिलकर ही मुझको
जीने का सलीका आया है
नाम तुम्हारा जब-जब साजन
मेरे लबों पर आया है
सारा का सारा आकाश सिमट
मेरी बाँहों मैं समाया है
"आशा" प्रेम कोई अभिशाप नहीं
पावन इक अहसास समाया है
दुनियाँ के जालिम लोगों ने इसे
मज़हब के नाम बलि चढ़ाया है
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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