शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

---------यादों के बादल--------

- जब भी तेरी यादों के बादल मन के आकाश पर छा जाते है चाँद तारे भी उदास होकर बादलों में छुप जाते हैं जब भी मन बैचेन होकर तेरी यादों मैं खो जाता है तेरा प्यार चाँदनी बन मन के आँगन मै उतर आता है तेरे आने की उम्मीद मैं हर आहट पर दिल मेरा धड़क जाता है शोख हवा का एक झोंका मन के द्वार को छू के गुजर जाता है बारिश की बूँदे जब-जब हौले से शाखों को सहलाती हैं दिल मैं दबी तेरी यादों की चिंगारी सुलग जाती है तेरी यादों के सिराहने हैं मेरी बोझिल पलकों के साये मैं भीग उठे हैं जज्बात मेरे तुम्हारे एहसास की नर्म बारिश मैं
पर डरती हूँ मैं हमदम इन उजली बस्ती के वाशिंदों से उजालों मैं रहकर भी मन मैं जिनके अंधेरों के साये हैं क्या समझेंगे वो लोग प्यार की पाकीजगी को जो दिल को खिलौना समझते हैं खेलते हैं तोड़ जाते हैं "आशा" बड़े जालिम इस दुनियाँ मैं लोग हुआ करते हैं गुनाह खुद करते हैं इल्जाम औरों के सिर मढ़ जाते हैं ...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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