शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

------------ हाथों की छुअन---------

तुम्हारे हाथों कीछुअन का हीअसर है येलगताहैहजारों गुलाबों की खुशबूहवाओं में बिखर गई हैशब्दों की जरूरत ही कहाँरह जाती हैलगता हैआँखेहीहाले-दिल-बयाँ कर रहीहैंतुम्हारे हाथों कीछुअन का हीअसर है ये...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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