रविवार, 23 फ़रवरी 2014

-------------माँ--------------


१. हालातों की आँधियों ने
जब भी मुझे ड़िगाना चाहा
माँ मेरा होंसला बनकर तूने
उनका रुख मोड़ दिया.

२.माँ तुम मैं ही मुझे
भगवान नज़र आता है
उससे तो माँगना पड़ता है
तुमसे बिन माँगे मिल जाता है

३ .न जाने क्यों लोग उसकी
चौखट पर शीश नवाते हैं
मुझे तो मंदिर,मस्ज़िद,गुरुद्वारा
तेरे चरणों मैं नजर आते हैं

४ उसके दर पर हम झोली
फ़ैलाते हैं
पर खाली हाथ ही लौट
आते हैं

५.पर हमारी माँ ने देखा जब भी
हमें उदास
बिन माँगे पूरी हो गयी हमारी हर
मुराद

६.बहुत बेरहम और जालिम है
ये दुनियाँ माँ
घबरा गई हूँ खोजती हूँ
तू चली गई कहाँ.

७.जब भी माँ मैं दर्द से
कराहती हूँ
तेरा हाथ हमेशा अपने सिर पे
सिर पे पाती हूँ .

८.माँ न मैंने रामायण पढ़ी
न गीता न कुरान
तेरी आँखों मैं जब भी देखा
मिला हर ग्रन्थ का ज्ञान .

९.गीता का सार तुम्ही हो
कुरान की आयतें भी
तुम्हीं पवित्र रामायण हो
तुम्हीं मैं निहित बाईबिल भी.

१०.दूर आस्माँ मैं जब कोई
तारा चमकता है
मुझे लगता है माँ तेरा नूर
बरसता है .
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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