एक दिन जब हम एक हो जायेंगेबँध जायेंगे दुनियाँ के बनाये बँधनों मेंतब भी हमएक हीरहेंगेहम दुनियाँ देखेंगे और सोचेंगेहम यूँ ही रहेंगेनसाथ -साथ ये दुनियाँका रंगतोहमपे नहींचढ़ेगाहम अपनाछोटासासपनो काघर बसायेंगेजहाँ हम दोनोंरहेंगेसाथ-साथमें तुम्हारे लिये खाना पकाऊँगीऔर तुम मेरी जरूरत कीसब चीजें दोगेमुझे लाकररात को जब हम सोयेंगेचाँद तारों से बात करेंगेसाथ-साथऔर जब कोई तारा टूटता देखेंगेउससे अपना जन्मोंका साथ मागेंगेसाथ-साथएक दिन जब हम एक हो जायेंगे
.......राधा श्रोत्रिय"आशा"
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