रविवार, 9 फ़रवरी 2014

------------------------जख्म-------------------------

दिल टूटने की आवाज नहीं होतीपर जख्म बहुत गहरा होता हैकोई दवा दुआ असर नहीं करतीजगह नाजुक जख्म गहराटूटता है काँच तो आवाज होती हैबिखर जाती है उसकी किरचेंएक आध किरच चुभ भी जायेमरहम पटटी करवा देते हैं लोगउन लोगों का क्या हँसकर जोइस दिल को जख्म दे जाते हैंऔर एहसास भी नहीं कर पाते खुदगर्ज यहाँ लोग हो जाते हैपर हमारी दरियादिली देखीयेजख्म खाकर भी हम मुस्कुराते हँसकर ज़ख्मों पे मरहम लगाते अपने भी कहाँ किसी काम आते ...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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