है माँ शारदे है माँ शारदे
अज्ञानता से मुझे तार दे !
पवित्र मन वाणी करदे,
है माँ शारदे है माँ शारदे
अज्ञानता से मुझे तार दे !
माँ मेरे अंतस मैं बस जाओ
जब भी लिखूँ मैं कुछ माँ ,
तुम मेरे शब्द बन जाओ !
है माँ शारदे है माँ शारदे
अज्ञानता से मुझे तार दे !
अपनी कृपा से माँ तुम,
मुझको पावन करदो
करुणा,प्यार और दया के,
भाव मेरे हृदय मैं भर दो !
है माँ शारदे है माँ शारदे
अज्ञानता से मुझे तार दे !
कभी किसी से नफरत न हो
रोप हृदय मैं बीज प्यार के,
मेरे अंतस को माँ तुम,
गंगाजल सा पावन करदो
है माँ शारदे है माँ शारदे
अज्ञानता से मुझे तार दे !
प्रेम सरिता बहे हृदय मैं,
मन मष्तिष्क निर्मल हो जाये,
रहे नहीं विकार कोई मन मैं,
जाति धर्म के बंधन मिट जाये,
है माँ शारदे है माँ शारदे
अज्ञानता से मुझे तार दे !
कोई छोटा न कोई बडा हो,
मन मैं सबके लिये दया हो !
है माँ शारदे है माँ शारदे
अज्ञानता से मुझे तार दे !
पवित्र मन वाणी करदे,
अज्ञानता से मुझे तार दे !
है माँ शारदे है माँ शारदे
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
११-०३-२०१४
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