हमारे एक मित्र पत्नीयोँ की तारीफ मैं इतना कुछ लिखते हैं,
कि दिल भर आता है !जब ज्यादा ही भर गया तो छलक पडा,
हमने भी भावों की स्याही कलम मैं भर कागज पर उतार दी....
उफ़्फ़ ये पति बिचारे,
काम के बोझ के मारे!
थके हाल घर आते हैं,
और सोफ़े पे पसर जाते हैं!
बीबी बडे प्यार से चाय ,
बनाती है,ले आती है !
क्या बात है,बडे थके हुये,
लग रहे हैं आप!
पति बोला हाँ डिअर सब ,
तुम्हारे और बच्चों के लिये है!
तुम्हारे हाथों की चाय जादू,
जगाती है!
थकान काफ़ुर हो जाती है!
पत्नी बोली जानेमन जेब मै,
हाथ ड़ालें और कुछ रुपये निकाले!
शापिंग जाना है!
पति झल्लाता है,
पिछले महिनें तो की,फिर शापिंग!
पत्नी, मुझसे आपकी ये हालत,
देखी नहीं जाती!
हमारे लिये इतनी तकलीफ़,
उठाते हो!
थककर चूर हो जाते हो,
कुछ खर्च कर आते हैं,
आपकी मेहनत सार्थक कर आते हैं!
बिचारे पति की हालत....
काटो तो खून नहीं.....
मन मार जेब मै हाथ डालता है!
रुपये बीबी के हाथ मैं,
थमाता है....
मन ही मन बड़बडाता है!
पता होता चाय का जादू......
तो तारीफ न....करता....
पत्नी मुस्कुराते हुये हाथ....
हिलाती है...शापिंग को...जाती है!
उफ़्फ़ ये पति बिचारा....
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२८-०३-२०१४
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