सोमवार, 24 मार्च 2014

***प्यार***

***प्यार***
प्यार और रिश्तों का तो,
जन्म से साथ होता है!!
वक्त की आँच पर तपकर,
ये सोने से निखर उठते हैं!!
कुछ रिश्ते सबसे जुदा, 
होते हैं!!
इन्हें संबधों मैं,
परिभाषित नहीं किया,
किया जा सकता!!
इनका संबधं तो सीधा,
अंर्तआत्मा से होता है!!
ये तो मन की डोर से,
बंधे होते हैं!!
अपनेपन का एहसास इनमें,
फूलों सी ताजगी भर देता है!!
ऊपर वाले से,
माँगी हुई दुआ जैसे!!
जो हौंसलों का दामन हमेशा,
थामके रखते हैं!!
और इनकी माँगी हुई दुआओं,
पर खुदा भी नजरे इनायत,
करता है!!
और माझी विपरीत,
बहाव मैं भी नाव चलाने,
का साहस कर लेता है!!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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