***आपाधापी***
भागती दौड़ती रफ़्तार मैं,
जिंदगी की!!
कितना कुछ बेशकीमती,
बेहिसाब,
छूट जाता है पीछे!!
उलझकर रह जाते हैं,
सुलझाने मैं जिंदगी के सवाल!!
भुला बैठते हैं अपना,
मासूम बचपन!!
माँ की मनुहार,
पिता का दुलार!!
छोटी-छोटी बातों पर,
भाई,बहिनों से की तकरार!!
फिर मिलजुलकर की गई,
किसी नई खुरापात की इज़ाद!!
वो स्कूल के दिनों की मस्ती,
पढ़ाइ के साथ की हुई,
प्यारी शरारतें!!
टीचर की ड़ाँट और घर मैं,
माँ के डंड़ों की बरसात!!
गाँड प्राँमिस लास्ट टाइम,
माँ पर खत्म होती हर बात!!
युवावस्था की खट्टी-मीठी,
कुछ छुई-अनछुई सी यादें!!
वो चेहरा जो उभरा जेहन मैं,
बनकर पहला प्यार!!
वो काँलेज के दिन,
और दोस्तों का साथ!!
पढ़ाई के साथ कैंटीन मैं,
गुजारे लम्हात,
भुलाये से न भुलाई जाती,
जिनकी याद!!
वो नेवी की क्लास ,
और लेट होने पर मास्टर-चीफ,
की फटकार!!
केम्पों के दिनों की मस्ती,
हल्की गुलाबी जाड़े की रातें,
खुले आसमान के नीचे
घंटों दोस्तों से की हुई बातें!!
याद आ जातें हैं आज भी,
वो बीते हुए पल!!
न किसी बात की चिन्ता,
न कल की थी कोई फ़िकर!!
कैद हैं मन के किसी कोने मैं,
आज की उलझनो मैं,
छिड़ी किसी पुरानी बातों पर!!
जब कभी याद आ जाते हैं वो ,
भूले बिसरे पल!!
खिल उठता है चेहरा,
फ़िर से कुछ पल!!
भागती दौड़ती रफ़्तार मैं,
जिंदगी की!!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२४-०३-२०१४
भागती दौड़ती रफ़्तार मैं,
जिंदगी की!!
कितना कुछ बेशकीमती,
बेहिसाब,
छूट जाता है पीछे!!
उलझकर रह जाते हैं,
सुलझाने मैं जिंदगी के सवाल!!
भुला बैठते हैं अपना,
मासूम बचपन!!
माँ की मनुहार,
पिता का दुलार!!
छोटी-छोटी बातों पर,
भाई,बहिनों से की तकरार!!
फिर मिलजुलकर की गई,
किसी नई खुरापात की इज़ाद!!
वो स्कूल के दिनों की मस्ती,
पढ़ाइ के साथ की हुई,
प्यारी शरारतें!!
टीचर की ड़ाँट और घर मैं,
माँ के डंड़ों की बरसात!!
गाँड प्राँमिस लास्ट टाइम,
माँ पर खत्म होती हर बात!!
युवावस्था की खट्टी-मीठी,
कुछ छुई-अनछुई सी यादें!!
वो चेहरा जो उभरा जेहन मैं,
बनकर पहला प्यार!!
वो काँलेज के दिन,
और दोस्तों का साथ!!
पढ़ाई के साथ कैंटीन मैं,
गुजारे लम्हात,
भुलाये से न भुलाई जाती,
जिनकी याद!!
वो नेवी की क्लास ,
और लेट होने पर मास्टर-चीफ,
की फटकार!!
केम्पों के दिनों की मस्ती,
हल्की गुलाबी जाड़े की रातें,
खुले आसमान के नीचे
घंटों दोस्तों से की हुई बातें!!
याद आ जातें हैं आज भी,
वो बीते हुए पल!!
न किसी बात की चिन्ता,
न कल की थी कोई फ़िकर!!
कैद हैं मन के किसी कोने मैं,
आज की उलझनो मैं,
छिड़ी किसी पुरानी बातों पर!!
जब कभी याद आ जाते हैं वो ,
भूले बिसरे पल!!
खिल उठता है चेहरा,
फ़िर से कुछ पल!!
भागती दौड़ती रफ़्तार मैं,
जिंदगी की!!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२४-०३-२०१४
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