शनिवार, 5 अप्रैल 2014

इश्क़

***** इश्क़ ***
इश्क़ मैं एक बार ड़ूब के देखो,
बड़ा ही हसींन ख्बाब लगता है!
"आशा" जो ड़ूब गया इक बार,
वो फ़िर न कभी पार लगता है!
...राधा श्रोत्रिय"आशा" ५-०४-२०१४***

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