रविवार, 25 मई 2014

फ़र्क

****** फ़र्क ******
मोहब्बत और इबादत मैं,
फ़र्क बस इतना है!
मोहब्बत मैं खोकर खुद को,
चाहत को पाना है!
इबादत मैं खुद को खोकर ,
पार उतर जाना है!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
२५-०५-२०१४

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