#*******# यकींन #******#
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा ,
यकींन हैं!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज,
होने लगी है!
करता था जो बातें बडी-बडी,
अपनायत और चाहत की!
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा,
यकींन हैं!
खुद से ही नफ़रत मुझे आज होने,
लगी है!
कहें किसे अपना हम करें किस पर,
यकींन!
हर रिशते मैं सियासत आज होने,
लगी है!
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा,
यकींन हैं!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज होने ,
लगी है!
खाई थी कसमें जिसने कभी प्यार,
वफ़ा की!
शामिल थी जिसकी हर दुआओं मैं,
में भी!
न जाने उसने कैसी ये बद्दुआ सी ,
मुझे दी है!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज होने ,
लगी है!
इक पल मैं है बदली रिशतों की हर,
तस्वीर उसने!
हर रिश्ते मैं मिलावट की बू सी आने,
लगी है!
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा ,
यकींन हैं!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज,
होने लगी है!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२५-०५-२०१४
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा ,
यकींन हैं!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज,
होने लगी है!
करता था जो बातें बडी-बडी,
अपनायत और चाहत की!
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा,
यकींन हैं!
खुद से ही नफ़रत मुझे आज होने,
लगी है!
कहें किसे अपना हम करें किस पर,
यकींन!
हर रिशते मैं सियासत आज होने,
लगी है!
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा,
यकींन हैं!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज होने ,
लगी है!
खाई थी कसमें जिसने कभी प्यार,
वफ़ा की!
शामिल थी जिसकी हर दुआओं मैं,
में भी!
न जाने उसने कैसी ये बद्दुआ सी ,
मुझे दी है!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज होने ,
लगी है!
इक पल मैं है बदली रिशतों की हर,
तस्वीर उसने!
हर रिश्ते मैं मिलावट की बू सी आने,
लगी है!
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा ,
यकींन हैं!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज,
होने लगी है!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२५-०५-२०१४
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें