रविवार, 25 मई 2014

#*******# यकींन #******#
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा ,
 यकींन हैं!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज​,
होने लगी है!
करता था जो बातें बडी-बडी,
अपनायत और चाहत की!
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा,
यकींन हैं!
खुद से ही नफ़रत मुझे आज होने,
लगी है!
कहें किसे  अपना हम करें किस पर​,
यकींन​!
हर रिशते मैं  सियासत आज होने,
लगी है!
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा,
 यकींन हैं!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज होने ​,
लगी है!
खाई थी कसमें जिसने कभी प्यार​,
वफ़ा की!
शामिल थी जिसकी हर दुआओं मैं,
में भी!
न जाने उसने कैसी ये बद्दुआ सी ,
मुझे दी है!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज होने ​,
लगी है!
इक पल मैं है बदली रिशतों की हर​,
तस्वीर उसने!
हर रिश्ते मैं मिलावट की बू सी आने,
लगी है!
कुछ इस तरह तोडा उसने मेरा ,
 यकींन हैं!
हर रिश्ते से नफ़रत सी आज​,
होने लगी है!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
२५-०५-२०१४

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