रविवार, 1 जून 2014

ख्बाबों की ताबीर

#******* ख्बाबों की ताबीर *******#
सच कह रहे हैं दिलो-जाँन से हम,
प्यार तुमसे ही है हमको सनम!
चाहो तो ले लो गीता,कुरान ,
की कसम!
करते हैं प्यार तुम्हें दिलो-जाँन,
से हम!
आये तो थे ख्बाब बनके ख्यालों,
में मेरे!
पर बन गये हो हर ख्बाब की,
ताबीर सनम!
जब से देखा है तुम्हें खुद पे ही,
बस न रहा मेरा!
ढ़ल गये तुम मैं ही हम बनके,
मोहब्बत सनम!
सच कह रहे हैं दिलो-जाँन से हम,
प्यार तुमसे ही है हमको सनम!
जुडते हैं तुमसे ही हर ,
एहसास मेरे!
तुम्हें देख मचल उठते हैं,
जज्बात सनम!
चाहो तो ले लो गीता,कुरान ,
की कसम!
करते हैं प्यार तुम्हें दिलो-जाँन,
से हम!
तुमसे मिलके खिल उठे है,
ख्बाब मेरे!
बन गये हो हर ख्बाब की तुम ,
ताबीर सनम!
"आशा" की धड़कन की स्पंदन ,
भी तुमसे!
तुम्हीं बन गये हो मेरा रब,अब,
मेरे सनम!
तुम्हे देखकर जी उठती ,
हूँ में!
गर दूर हो तो लगे थमी सी,
हर धड़कन!
सच कह रहे हैं दिलो-जाँन से हम,
प्यार तुमसे ही है हमको सनम!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१-०६-२०१४

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