शुक्रवार, 13 जून 2014

"आँखे"

हमारे संग्रह "आँखे"से आप सबको नज़र है....
आज तुमसे बरसों बाद​,
मुलाकात हुई!
युँ लगा वक़्त ,
थम सा गया हो!
गुज़रे वक़्त का हर पल​,
चल​-चित्र के  जैसे,
आँखों के सामने ,
तैर गया!
शब्द मुँह मैं,
कैद हो रह गये!
लगा किसी ने जुबाँ पे,
ताला जड़ दिया हो!
कहने सुनने को,
बहुत कुछ था!
वक़्त हालात ,
बस मैं नहीं थे!
और तुम भी तो,
अब अपने नहीं थे!
आखों से बहते अश्क़​,
हाले-ऐ-दिल बयाँ,
कर रहे थे!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

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