शनिवार, 14 जून 2014

लम्हा

******* लम्हा *******
तुमने हमसे मूँह क्या मोड़ा,
लगता है सारी कायनात,
हमसे रूठ ग​ई!!
वक्त का हर लम्हा साथ गुजारे,
पलों का हिसाब माँगा ,
 करता है!!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

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