******** बेखुदी *********
मैं तो जिधर देखती हूँ,
वो ही नजर,
आते हैं मुझे!!
किस राह पर ले आयी है,
मेरी बेखुदी मुझे,
उनसे जब नजरें मिलीं,
में मैं न रही!!
आँखें हैं उनकी, नजर ,
कुछ और ,
आता नहीं है मुझे!
जरूरी नहीं ,
हर ख्वाईश दिल की.,
पूरी न हो!!
ये अलग बात है कि ,
उनको इसकी खबर ,
तक न हो!!
भीगती रहीं रात भर ,
उनके इंतजार मैं ,
मेरी आँखें!!
चाँद के इंतजार मैं जैसे,
रात भर जागें,
हों तारे!!
उनकी नजर का,
ये कैसा जादू है "आशा"
मेरी नजर भी अब ,
पहचानती नहीं मुझे !!
मैं तो जिधर देखती हूँ,
वो ही नजर,
आते हैं मुझे!!
…राधा श्रोत्रिय”आशा”
मैं तो जिधर देखती हूँ,
वो ही नजर,
आते हैं मुझे!!
किस राह पर ले आयी है,
मेरी बेखुदी मुझे,
उनसे जब नजरें मिलीं,
में मैं न रही!!
आँखें हैं उनकी, नजर ,
कुछ और ,
आता नहीं है मुझे!
जरूरी नहीं ,
हर ख्वाईश दिल की.,
पूरी न हो!!
ये अलग बात है कि ,
उनको इसकी खबर ,
तक न हो!!
भीगती रहीं रात भर ,
उनके इंतजार मैं ,
मेरी आँखें!!
चाँद के इंतजार मैं जैसे,
रात भर जागें,
हों तारे!!
उनकी नजर का,
ये कैसा जादू है "आशा"
मेरी नजर भी अब ,
पहचानती नहीं मुझे !!
मैं तो जिधर देखती हूँ,
वो ही नजर,
आते हैं मुझे!!
…राधा श्रोत्रिय”आशा”
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