बुधवार, 23 जुलाई 2014

नजरों की ओस

******* नजरों की ओस ******
तेरे एहसास की,
पावन ओस मैं नहाकर​!
लोग कहते हैं,
तन​-मन मेरा निखर,
आया है!
तेरी नजरों की ओस​,
जब गिरी मेरे चेहरे पर​,
लोग कहते हैं मुझमैं तेरा,
 नूर उतर आया है!
"आशा" भूल गयी तेरी,
चाहत मैं दुनियाँ को !
तेरे प्यार को ही हमने,
अपना खुदा बनाया है!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

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