रविवार, 20 जुलाई 2014

हवा का झोंका

---------हवा का झोंका--------
आज सुबह जब हमने,
खिड़की खोली!!
एक ताजा हवा का झोंका,
अंदर आ गया !!
और हौले से हमारे ,
बालों को,
 सहला गया !!
मन में दबी तुम्हारी ,
यादों के फूलों को फिर से,
 महका गया !!
आज सुबह जब हमने,
खिड़की खोली !!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें