सोमवार, 21 जुलाई 2014

साथ​-साथ

***** साथ​-साथ *******
एक दिन  हम जब,
एक हो जायेंगे !
बँध जायेगें हम ,
 दुनिया के  बनाये ,
 बँधनों मैं!
 तब भी हम एक ही रहेंगे ,
हम दुनियाँ देखेंगे ,
और सोचेंगे !
हम यूँ ही रहेंगे न,
साथ​-साथ !
ये दुनियाँका रंग तो ,
 नहीं चढ़ेगा हम पर!
हम अपना छोटा सा,
 सपनो का घर बसायेंगे!
जहाँ हम दोनों रहेंगे,
 साथ-साथ!
 तुम्हारे लिये मैं खाना ,
पकाऊँगी ,
और तुम  जरूरत की,
सब चीजें लाकर,
 दोगे मुझे!
रात को  जब हम दोनो,
 सोयेंगे!
 चाँद तारों से बात करेंगे,
साथ-साथ!
और जब हम देखेंगे ,
  टूटता तारा !
 माँग लेंगे हम  दोनो,
 उससे अपना ,
जन्मों-जन्मों का साथ​!
साथ-साथ!
एक दिन जब ,
हम एक हो जायेंगे!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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