***** साथ-साथ *******
एक दिन हम जब,
एक हो जायेंगे !
बँध जायेगें हम ,
दुनिया के बनाये ,
बँधनों मैं!
तब भी हम एक ही रहेंगे ,
हम दुनियाँ देखेंगे ,
और सोचेंगे !
हम यूँ ही रहेंगे न,
साथ-साथ !
ये दुनियाँका रंग तो ,
नहीं चढ़ेगा हम पर!
हम अपना छोटा सा,
सपनो का घर बसायेंगे!
जहाँ हम दोनों रहेंगे,
साथ-साथ!
तुम्हारे लिये मैं खाना ,
पकाऊँगी ,
और तुम जरूरत की,
सब चीजें लाकर,
दोगे मुझे!
रात को जब हम दोनो,
सोयेंगे!
चाँद तारों से बात करेंगे,
साथ-साथ!
और जब हम देखेंगे ,
टूटता तारा !
माँग लेंगे हम दोनो,
उससे अपना ,
जन्मों-जन्मों का साथ!
साथ-साथ!
एक दिन जब ,
हम एक हो जायेंगे!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
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