**** तलाश ******
भटके ताउम्र,
तलाश मैं,
जिसकी!
की तेरी मेरी,
अपनी-पराई!
इसमैं सारी,
उम्र गवाँई !
न झाँका कभी,
खुद अपने,
मन मैं!
खुद से हुए,
रूबरू जब ,
पा लिया उसे!
भटके ताउम्र,
तलाश मैं,
जिसकी!
...राधा श्रोत्रिय ” आशा ”
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें