*****ऐ मेरी कविता ****
ऐ मेरी कविता, हुई रूबरू,
जब तुमसे पहली बार !
तुम मिली मुझे बनके ,
मेरी माँ का प्यार !
फिर तब,जब धड़की,
तुम मेरे गर्भ मैं,
पहली बार!
महसूस हुई नन्हीं,
नाजुक,कोमल ,
अनमोल सी छुअन तुम्हारी,
पहली बार!
ली मेरी ममता ने अंगड़ाई,
बज उठी मन मैं मेरे,
उमंगों की शहनाई!
जनमी कोख से तुम मेरी,
लिया गोद मैं तुम्हें जब
पहली बार!
भर आये आँचल,
भीग उठे जज्बात,
उतर आया आँखों मैं,
ममता का सैलाब,
पहली बार!
लगा छाती से तुम्हें,
तृप्त हुआ मातृत्व,
पहली बार !
ममता हुई निहाल,
पाकर तुम्हारा प्यार,
पहली बार!
ऐ मेरी कविता, हुई रूबरू,
जब तुमसे पहली बार !
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२८-०७-२०१४
ऐ मेरी कविता, हुई रूबरू,
जब तुमसे पहली बार !
तुम मिली मुझे बनके ,
मेरी माँ का प्यार !
फिर तब,जब धड़की,
तुम मेरे गर्भ मैं,
पहली बार!
महसूस हुई नन्हीं,
नाजुक,कोमल ,
अनमोल सी छुअन तुम्हारी,
पहली बार!
ली मेरी ममता ने अंगड़ाई,
बज उठी मन मैं मेरे,
उमंगों की शहनाई!
जनमी कोख से तुम मेरी,
लिया गोद मैं तुम्हें जब
पहली बार!
भर आये आँचल,
भीग उठे जज्बात,
उतर आया आँखों मैं,
ममता का सैलाब,
पहली बार!
लगा छाती से तुम्हें,
तृप्त हुआ मातृत्व,
पहली बार !
ममता हुई निहाल,
पाकर तुम्हारा प्यार,
पहली बार!
ऐ मेरी कविता, हुई रूबरू,
जब तुमसे पहली बार !
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२८-०७-२०१४
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