सोमवार, 25 अगस्त 2014

****** आँखे (इज़हारे इश्क ३ )******

****** आँखे (इज़हारे इश्क ३ )******
तुम्हारे हाथों की ,
छुअन का ही असर है!
लगता है,चारोंतरफ़​,
हज़ारों गुलाबों की खुशबू ,
हवाओं में बिखर ग​ई है !
लफ़्ज़ों की जरूरत ही ,
कहाँ रह जाती है!
लगता है आँखें ही,
हाले-दिल बयाँ कर रही हैं!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें