****** आँखे (इज़हारे इश्क ३ )******
तुम्हारे हाथों की ,
छुअन का ही असर है!
लगता है,चारोंतरफ़,
हज़ारों गुलाबों की खुशबू ,
हवाओं में बिखर गई है !
लफ़्ज़ों की जरूरत ही ,
कहाँ रह जाती है!
लगता है आँखें ही,
हाले-दिल बयाँ कर रही हैं!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
तुम्हारे हाथों की ,
छुअन का ही असर है!
लगता है,चारोंतरफ़,
हज़ारों गुलाबों की खुशबू ,
हवाओं में बिखर गई है !
लफ़्ज़ों की जरूरत ही ,
कहाँ रह जाती है!
लगता है आँखें ही,
हाले-दिल बयाँ कर रही हैं!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
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