******* आज की लडकी *********
डरती नहीं है ,
निकलते वक्त घर से,
आज की लडकी!
जानती है वो,
अनगिनत शैतानी रूहें,
आदम रूप मैं है!
कुछ जानी पहचानी,
नकाब लिये चेहरों पर,
कुछ अंजान!
मसलना चाहते हैं,
मासुमियत उसकी!
जिनकी गिद्ध दृष्टी ,
होती है उसके,
शरीर के उभारों पर!
भूल जाते हैं उस वक्त,
अपनी माँ का आँचल!
जिन उभारों पर
डालते हैं,कु-दृष्टी
भूल जाते हैं ये,उस वक्त
इनकी माँओं ने इन्ही से
,क्षुधा पूर्ति कर,
जीवन-दान
दिया है इन्हें!
नहीं याद आती इन्हें,
युवा होती अपनी बहिन,
इन्हें दिखती है,
घर से बाहर निकलती,
युवा लडकी!
मतलब नहीं ,
रूप सोन्दर्य से इन्हे!
ग्रसित हैं,
किसी मानसिक बिमारी,
या नशे मैं धुत होते हैं!
इनकी नज़र होती है,
उन मासूमों की देह पर,
जिससे भूख मिटा सकें,
अपने जिस्म की !
नोंच खा लेना
चाहते हैं,उसे,
पर भाँप लेती है नापाक ,
इरादे उनके!
कामयाब नहीं होने देती,
कोशिश करती है,
कि खाल,
खींच डाले इन हैवानो की!
जिन्होने उनका जीना ,
मुश्किल किया है!
पर अंधे कानून के आगे,
विवश हो,
टेकती है घुटने!
क्यों हमारा समाज ,
इन बेकसूरों पर ,
इतना अत्याचार होते देख ,
अंधा,गूँगा,बहरा है !
जब आज की लडकी
तैयार है,
अन्याय के खिलाफ़ ,
लडने को!
तो हम आप सब ,
साथ क्यों नहीं!
जिस दिन हम सबकी आवाजे मिल एक होगीं----
तब ये हैवान सुधर जायेंगे, या इनकी रूह भी काँपेगी----
किसी लडकी पर गलत दृष्टी डालने से पहले----
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२३-०८-२०१४
डरती नहीं है ,
निकलते वक्त घर से,
आज की लडकी!
जानती है वो,
अनगिनत शैतानी रूहें,
आदम रूप मैं है!
कुछ जानी पहचानी,
नकाब लिये चेहरों पर,
कुछ अंजान!
मसलना चाहते हैं,
मासुमियत उसकी!
जिनकी गिद्ध दृष्टी ,
होती है उसके,
शरीर के उभारों पर!
भूल जाते हैं उस वक्त,
अपनी माँ का आँचल!
जिन उभारों पर
डालते हैं,कु-दृष्टी
भूल जाते हैं ये,उस वक्त
इनकी माँओं ने इन्ही से
,क्षुधा पूर्ति कर,
जीवन-दान
दिया है इन्हें!
नहीं याद आती इन्हें,
युवा होती अपनी बहिन,
इन्हें दिखती है,
घर से बाहर निकलती,
युवा लडकी!
मतलब नहीं ,
रूप सोन्दर्य से इन्हे!
ग्रसित हैं,
किसी मानसिक बिमारी,
या नशे मैं धुत होते हैं!
इनकी नज़र होती है,
उन मासूमों की देह पर,
जिससे भूख मिटा सकें,
अपने जिस्म की !
नोंच खा लेना
चाहते हैं,उसे,
पर भाँप लेती है नापाक ,
इरादे उनके!
कामयाब नहीं होने देती,
कोशिश करती है,
कि खाल,
खींच डाले इन हैवानो की!
जिन्होने उनका जीना ,
मुश्किल किया है!
पर अंधे कानून के आगे,
विवश हो,
टेकती है घुटने!
क्यों हमारा समाज ,
इन बेकसूरों पर ,
इतना अत्याचार होते देख ,
अंधा,गूँगा,बहरा है !
जब आज की लडकी
तैयार है,
अन्याय के खिलाफ़ ,
लडने को!
तो हम आप सब ,
साथ क्यों नहीं!
जिस दिन हम सबकी आवाजे मिल एक होगीं----
तब ये हैवान सुधर जायेंगे, या इनकी रूह भी काँपेगी----
किसी लडकी पर गलत दृष्टी डालने से पहले----
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२३-०८-२०१४
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