******** जय -शिव **********
शिव-शक्ती के संग विराजें,
गले में सर्प-हार है !!
द्वारे पे नन्दी सोहें,
बने वो द्वार-पाल हैं!!
मष्तक पे चंद्र विराजें,
जटा मैं गंगधार है!!
ऐसे भोलेबाबा को ,
मेरा नमस्कार है!!
बिष पीकर के वो सारा,
नील -कंठ कहाये है!!
सबके जीवन मैं वो,
अमृत ही छलकाये हैं!!
शरणागत जो उनके जाये,
पल मैं कष्ट मिट जाये है!!
अकाल मृत्यु को हर ले,
दुख जनके मिटाये हैं!!
शमशान मैं वास है जिनका ,
भस्मी ही श्रंगार है!!
ऐसे भोलेबाबा को ,
मेरा नमस्कार है!!
शिव-शक्ती के संग विराजें,
गले में सर्प-हार है !!
द्वारे पे नन्दी सोहें,
गले मैं मुण्डमाल है!!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०४-०८-२०१४
शिव-शक्ती के संग विराजें,
गले में सर्प-हार है !!
द्वारे पे नन्दी सोहें,
बने वो द्वार-पाल हैं!!
मष्तक पे चंद्र विराजें,
जटा मैं गंगधार है!!
ऐसे भोलेबाबा को ,
मेरा नमस्कार है!!
बिष पीकर के वो सारा,
नील -कंठ कहाये है!!
सबके जीवन मैं वो,
अमृत ही छलकाये हैं!!
शरणागत जो उनके जाये,
पल मैं कष्ट मिट जाये है!!
अकाल मृत्यु को हर ले,
दुख जनके मिटाये हैं!!
शमशान मैं वास है जिनका ,
भस्मी ही श्रंगार है!!
ऐसे भोलेबाबा को ,
मेरा नमस्कार है!!
शिव-शक्ती के संग विराजें,
गले में सर्प-हार है !!
द्वारे पे नन्दी सोहें,
गले मैं मुण्डमाल है!!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०४-०८-२०१४
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें