सोमवार, 4 अगस्त 2014

वक्त

********* वक्त *********
वक्त के बेरहम हाथों ने,
हमें तुमसे जुदा,
कर दिया !!
तुमने वक्त के हाथ ,
रोकने की ,बहुत ,
कोशिश की!!
पर उसके क्रूर, शिकंजे से,
तुम हमें,नहीं,
बचा सके !!
और हम, बिन पानी की,
मछली, की तरह​,
छटपटाते, ही रह गये!!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें