रविवार, 17 अगस्त 2014

* हृदय -स्थली

****** हृदय -स्थली *******
बडी उपजाऊ है,
हृदय -स्थली,
विचार आते ही ,
स्वतः रोपित हो जाते है ---------
बिना किसी,
प्रयास या उपचार!
न किसी दवा की,
जरूरत इसे!
न किसी खाद की मोहताज-------
सक्षमता है खुद मैं ही,
निपटने की
हर परिस्थितीयों से!
पलती रहती है कविता,
हृदय -स्थली मैं,
 अंदर धरातल पर,
सहेजती कितना कुछ स्वंय मैं-------
जब परिपक्व होती है,
मष्तिषक सुप्त अवस्था मैं,
चला जाता है !
पढ़ी जाती है जब,
कागज़ों पर !
खोज़ती है वजह अपने होने की----------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१८-०८-२०१४
****** हृदय -स्थली *******
बडी उपजाऊ है,
हृदय -स्थली,
विचार आते ही ,
स्वतः रोपित हो जाते है ---------
बिना किसी,
प्रयास या उपचार!
न किसी दवा की,
जरूरत इसे!
न किसी खाद की मोहताज-------
सक्षमता है खुद मैं ही,
निपटने की
हर परिस्थितीयों से!
पलती रहती है कविता,
हृदय -स्थली मैं,
 अंदर धरातल पर,
सहेजती कितना कुछ स्वंय मैं-------
जब परिपक्व होती है,
मष्तिषक सुप्त अवस्था मैं,
चला जाता है !
पढ़ी जाती है जब,
कागज़ों पर !
खोज़ती है वजह अपने होने की----------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१८-०८-२०१४Chat conversation end

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