********** सुहानी-भोर ***********
सुहानी-भोर की बेला आयी,
सूरज जी ने भी ली अंगडाई!
उठो जागो सब आँखें खोलो,
सुबह की सुहानी बेला देखो!
रशमियों ने भी पंख फैलाये ,
सबके मन मैं नयी उमंगे जगाये
गगन मैं भरने को उडान ,
घरोंदों से निकल पंक्षी आये!
खिल-खिला उठी हैं कलिया,
मंद-मंद देखो फूल मुस्कुराये!
गले मिलके वृक्ष लताओं से,
पुरबाई मस्ती मैं झूमें गाये !
सूर्य-देव भी देख मुस्कुरायें ,
लोग जल भर अर्घ्य चढायें!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०९-०८-२०१४
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