शुक्रवार, 8 अगस्त 2014

सुहानी-भोर

********** सुहानी-भोर *********** सुहानी-भोर की बेला आयी, सूरज जी ने भी ली अंगडाई! उठो जागो सब आँखें खोलो, सुबह की सुहानी बेला देखो! रशमियों ने भी पंख फैलाये , सबके मन मैं नयी उमंगे जगाये गगन मैं भरने को उडान , घरोंदों से निकल पंक्षी आये! खिल​-खिला उठी हैं कलिया, मंद​-मंद देखो फूल मुस्कुराये! गले मिलके वृक्ष लताओं से, पुरबाई मस्ती मैं झूमें गाये ! सूर्य-देव भी देख मुस्कुरायें , लोग जल भर अर्घ्य चढायें! ...राधा श्रोत्रिय​"आशा" ०९-०८-२०१४

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