शनिवार, 9 अगस्त 2014

.कच्चे - धागे **

*****.कच्चे - धागे *******
लफ़्ज़ों में ये न ढल पाये,
रिशता है ये अनमोल​!
भाई-बहिन के प्यार मैं,
बसता है रब का नूर !
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
१०-०८-२०१४  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें