******* कोमल झरना ******
कोमल भावों का एक झरना मन में,
अनवरत झरता रहता है !
समय की ताल से,
मिलाकर कदम से कदम,
न रुकता है,न ठहरता है!
निर्मल,स्वच्छ,पवित्र पावन सा,
राग ,द्वेष रहित रहता है!
मष्तिष्क में उठते विचारों के,
झंझावत से,जब ये टकराता है!
प्रकृति मैं फैल रहे प्रदूषण सा,
विषाक्त ये भी हो जाता है!
खो जाते हैं कोमल भाव ,
विचार दूषित घुल जाते हैं !
सुख,दुख,अपना,पराया,
बैर,हिंसा,क्रोध ,लालच!
भूल सीमा इंनसानियत की,
इंसान बन जाता शैतान!
दुनियाँ के बदलते रंग में,
वो भी लिप्त हो जाता है!
मन में बहता कोमल भावों का वो झरना,
न जाने कहाँ खो जाता है!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
१४-०९-२०१४http://shrotriyaradhablog.blogspot.in/
कोमल भावों का एक झरना मन में,
अनवरत झरता रहता है !
समय की ताल से,
मिलाकर कदम से कदम,
न रुकता है,न ठहरता है!
निर्मल,स्वच्छ,पवित्र पावन सा,
राग ,द्वेष रहित रहता है!
मष्तिष्क में उठते विचारों के,
झंझावत से,जब ये टकराता है!
प्रकृति मैं फैल रहे प्रदूषण सा,
विषाक्त ये भी हो जाता है!
खो जाते हैं कोमल भाव ,
विचार दूषित घुल जाते हैं !
सुख,दुख,अपना,पराया,
बैर,हिंसा,क्रोध ,लालच!
भूल सीमा इंनसानियत की,
इंसान बन जाता शैतान!
दुनियाँ के बदलते रंग में,
वो भी लिप्त हो जाता है!
मन में बहता कोमल भावों का वो झरना,
न जाने कहाँ खो जाता है!
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
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