सोमवार, 22 सितंबर 2014

पिता

***************** पिता *********************
पिता जैसा दुनियाँ में नहीं ,कोई किरदार होता है,
जो देता है खुशियाँ, नहीं उसको गुमाँन होता है !
माँ के आँचल के,बिछोने सा रेशमी,एहसास होता है,
मंदिर में सुबह के शंखनाद जैसा,
बच्चों की हर मुश्किल पल में,फ़रिश्तों के जैसा,
 पिता होता है !
बहाकर अपना खून -पसीना,नहीं थकान का जिन्हें,
 एहसास होता है !
बच्चों की आँखों के मासूम सपनों का पिता,
इंतजार होता है !
माँ की लोरी मैं भी तो जिक्र पिता का ही,
होता है !
पिता जैसा दुनियाँ में नहीं कोई, किरदार होता है,
जो देता है खुशियाँ, नहीं उसको गुमाँन होता है !
पत्थर ,ईंट से बने घर की जो पहचान होता है,
पिता जैसा नहीं जग मैं कोई ,महान होता है-----
थाम के उँगली बच्चों को वो ,
कर्म -पथ दिखलाता है !
काँटों भरी राह में,फूल खुशियों के,
जो बिछाता है !
खुद जागता है जो, रात भर​,
बच्चों को सुलाता है,
पर उसकी कुरबानी का नहीं,
गुणगान होता है,
वो इंसान के रूप में खुद ,भगवान होता है --------
फल की गुणवत्ता में,बीज का अहम किरदार होता है,
बगिया की शोभा माली का,श्रम​-दान होता है ,
 कुछ नहीं कहता, अपनी फुलवारी देख जो
खुश होता है---------
पिता जैसा दुनियाँ में नहीं कोई किरदार होता है,
जो देता है खुशियाँ, नहीं उसको गुमाँन होता है !
माँ जननी तो जनक पिता है,
विधाता ने दोनो को एक दूजे के लिये,
रचा है !
"आशा" माँ,पिता का दिल दुखाकर​,नहीं कोई,
 महान होता है !
मंदिर​,मस्ज़िद खूब​ शीश नवाओं तुम​,
 पर चरणों में माँ  - पिता के  ही भगवान,
 होता है !
पिता जैसा दुनियाँ में नहीं कोई किरदार होता है,
जो देता है खुशियाँ, नहीं उसको गुमाँन होता है !
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
२२-०९-२०१४

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