गुरुवार, 4 सितंबर 2014

******** कविता (५)*******

********  कविता (५)*******


सुबह की पहली दुआ,
हर सुबह का ,
खुशनुमा आगाज़ तुझसे है!
जब तू आ जाती है,
ज़ेहन में मेरे,
मुस्कुरा उठते हैं अधर​,
खिल उठता है मन का कमल​--------
आ जाती है आँखों मैं चमक​,,
सच्चा प्यार जो तुझसे है,
मेरे दिल को ,
ऐतबार तुझसे है!
एे मेरी कविता,मेरी जिंदगी,
मेरी मोहब्बत,मेरी बंदगी तुझसे है------
में  तुझको खुद मैं,पाना
चाहती हूँ!
तू बस जा धड़कन बन ,
साँसों में मेरी!
कि में  तेरी हो तुझमें ,
समाना,चाहती हूँ!
बर्षों से है प्यासी ,
ये रूह मेरी,
 कि तेरी रूह मैं, समाना चाहती हूँ--------    
शिद्दत से हैं लव, प्यासे तेरे लिये,
कि अब  प्यास ,लवों की ,
बुझाना,चाहती हूँ!
मेरी कविता मेरी जाँ,
ज़िन्दगी,
मैं तुझमें ढ़ल जाना ,
चाहती हूँ!
"आशा" सरगम बन बस जा,
तू साँसों मैं मेरी!
कि में धड़कन की वीणा मैं,
खो  जाना चाहती हूँ-----------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
२३-०८-२०१४

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