***** आँसू की तकलीफ़ *****
जब कभी ठहर जाता है,दर्द .
कतरा-कतरा पिघल आँखों में,
जम सा जाता है,मानो ,
तकलीफ़देह, होता है कितना ,
आँख से आँसू का न बहना--------------
जिसका जो काम है,
अगर वो न करे,
उलझन सी होती तो है दिल को,
पर आँसू की तकलीफ़
उसका क्या,
कहाँ जानी किसी ने---------
हर खुशी हर गम में,
बिन बुलाये मेहमान जैसे,
बह आते हैं आँखों के रास्ते,
थम सा गया है, वो अगर,
असहनीय पीडा हुई होगी,उसे भी-----------
ग्रन्थी ही सही,
हिस्सा तो जिस्म का ही है,
जब कभी ठहर जाता है,दर्द .
कतरा-कतरा पिघल आँखों में----------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०३-०९-२०१४http://shrotriyaradhablog.blogspot.in/
जब कभी ठहर जाता है,दर्द .
कतरा-कतरा पिघल आँखों में,
जम सा जाता है,मानो ,
तकलीफ़देह, होता है कितना ,
आँख से आँसू का न बहना--------------
जिसका जो काम है,
अगर वो न करे,
उलझन सी होती तो है दिल को,
पर आँसू की तकलीफ़
उसका क्या,
कहाँ जानी किसी ने---------
हर खुशी हर गम में,
बिन बुलाये मेहमान जैसे,
बह आते हैं आँखों के रास्ते,
थम सा गया है, वो अगर,
असहनीय पीडा हुई होगी,उसे भी-----------
ग्रन्थी ही सही,
हिस्सा तो जिस्म का ही है,
जब कभी ठहर जाता है,दर्द .
कतरा-कतरा पिघल आँखों में----------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
०३-०९-२०१४http://shrotriyaradhablog.blogspot.in/

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