शनिवार, 18 अक्टूबर 2014

आज की सुबह


  आज की सुबह बहुत ही खास है !ऐसा प्रतीत हो रहा है,कि सुबह की 
ताजा नर्म हवा ओस में नहाकर मखमआज की सुबहली हो आई है!
उदित होते सूर्य की पावन रश्मियों की झिलमिल-झिलमिल अदभुत ,
एवं मनोहारी दृशय प्रस्तुत कर रही हैं !
लगता है, किसी कुशल चित्रकार ने अपनी कल्पनाओं के रंग आकाश के,
केनवास पर उतार दिये हो !
उड़ान भरते चहचहाते हुये पंक्षियों के, मधुर कलरव,फूलों पर मँडराती,
सुन्दर शोख तितलियाँ,किसी परिस्तान की शहज़ादी से,
 खुद को कम न समझती है,और अपने मन मोहक रंगों से बरबस सबका,
ध्यान अपनी और आकर्षित कर लेती है !
फूलों का रस पी-पीकर झूम-झूमकर मधुर गुंजन करते भँवरें कानों में मधुर ,
रस घोल जाते हैं !
भोर के आगमन से उत्साहित वृक्ष लतायें भी हवाओं के साज पर एक मधुर ,
स्वर प्रस्फुटित कर रही हैं !
उस पर मंदिर से आती घंटियों की सुमधुर ध्वनी,एक अदभुत सी सुखद अनुभूति,
मन में उतपन्न करती हैं !
मन करता है कि ये पल बस युँही थम जायें,कुदरत के इस रुहानी मंजर को खुद में,
आत्मसात करलें !
कितनी अदभुत,अनछुई,नर्म ,नाज़ुक ,सी है,किसी नव योवना ने अपने चेहरे से ,
पहली बार घूँघट उठाया जैसे, दीपावली के आगमन में प्रतीक्षारत ये सुबह------
...राधा श्रोत्रिय"आशा

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