********** पाक मोहब्ब्त ************
आज हम उनसे मिले तो ,
जमाने के हर बंधन को ,
भुला बैठे !
और उनके आगोश में
समा गये.!
जिस्म का तो हमें होश नहीं ,
पर उनकी पाक मोहब्बत में
हम इस कदर खो गये !
कि हमेशा के लिये,हमारी रूहें,
एक हो गयी !
और हम हमेशा के लिये,
एक ऐसे अटूट ,
बंधन में बँध गये जिसको ,
लब्ज़ों में ढ़ालना ,
हमारे बस में नहीं.!
कोशिश करते हें तो
लब्ज़ भी उनकी ,
पाक मोहब्ब्त के आगे,
बौने से नजर आते .है!!
लगता है!जैसे ,
खुदा से माँगी हुई हर दुआ,
आज क़ुबूल हो ग़यी------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
आज हम उनसे मिले तो ,
जमाने के हर बंधन को ,
भुला बैठे !
और उनके आगोश में
समा गये.!
जिस्म का तो हमें होश नहीं ,
पर उनकी पाक मोहब्बत में
हम इस कदर खो गये !
कि हमेशा के लिये,हमारी रूहें,
एक हो गयी !
और हम हमेशा के लिये,
एक ऐसे अटूट ,
बंधन में बँध गये जिसको ,
लब्ज़ों में ढ़ालना ,
हमारे बस में नहीं.!
कोशिश करते हें तो
लब्ज़ भी उनकी ,
पाक मोहब्ब्त के आगे,
बौने से नजर आते .है!!
लगता है!जैसे ,
खुदा से माँगी हुई हर दुआ,
आज क़ुबूल हो ग़यी------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
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