रविवार, 12 अक्टूबर 2014

पाक मोहब्ब्त

**********  पाक मोहब्ब्त ************
आज हम उनसे मिले तो ,
जमाने के हर बंधन को ,
 भुला बैठे !
और उनके आगोश में
समा गये.!
जिस्म का तो हमें होश नहीं ,
पर उनकी पाक मोहब्बत में
हम इस कदर खो गये !
कि  हमेशा के लिये,हमारी रूहें,
एक हो गयी !
और हम हमेशा के लिये,
 एक ऐसे अटूट ,
बंधन में बँध गये जिसको ,
लब्ज़ों में ढ़ालना  ,
हमारे बस  में नहीं.!
कोशिश करते हें तो
लब्ज़ भी उनकी ,
 पाक मोहब्ब्त के आगे,
बौने से नजर आते  .है!!
लगता  है!जैसे ,
खुदा से माँगी हुई हर दुआ,
 आज क़ुबूल हो ग़यी------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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