सोमवार, 13 अक्टूबर 2014

******** पैगाम ************

******** पैगाम ************

किस ने दिल के बंद दरवाजे पे ,
हल्के से थाप  लगाई .है  !
  सदियाँ बीत गई,
 रोशनी एक किरण तक जहाँ,
 न पहुँच पाई .,
तेरे आने के एहसास भर ने वहाँ
एक उम्मीद  सी बंधाई .है  !
एक थाप ने सदियों से जकडे,
 दरवाजों को खोल दिया !
 न खुलते तो ,
 प्यार की रूसवाई हो जाती !
अजीब है ये, मोहब्बत ,
और उसकी ,
 दीवानगी  का आलम .!
जिसके होने की आह्ट से ,
सदियों से बंद पडे दरवाजों में,
हलचल सी हो उठी !
शायद हवायें उसका पैगाम
 ले आई !
कभी जहाँ मोहब्बत के चिराग ,
रोशन हुआ करते थे!
 वहाँ आज अंधेरों का ,
पहरा रहता है  !
पर तेरे आने के एहसास भर ने ,
सदियों से बंद दिल के दरवाजे ,
खोल दिये !
और फिर ये साबित कर दिया ,
कि प्यार में दो जिस्म नहीं,
दो रूहें एक हो जाती है!
सच्चे प्रेमियों के लिये ये पैगाम
 छोड जाती  है  !
प्यार दो जिस्मों का नहीं ,
दो आत्माओं का मिलन होता  है--------------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"

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