******** पैगाम ************
किस ने दिल के बंद दरवाजे पे ,
हल्के से थाप लगाई .है !
सदियाँ बीत गई,
रोशनी एक किरण तक जहाँ,
न पहुँच पाई .,
तेरे आने के एहसास भर ने वहाँ
एक उम्मीद सी बंधाई .है !
एक थाप ने सदियों से जकडे,
दरवाजों को खोल दिया !
न खुलते तो ,
प्यार की रूसवाई हो जाती !
अजीब है ये, मोहब्बत ,
और उसकी ,
दीवानगी का आलम .!
जिसके होने की आह्ट से ,
सदियों से बंद पडे दरवाजों में,
हलचल सी हो उठी !
शायद हवायें उसका पैगाम
ले आई !
कभी जहाँ मोहब्बत के चिराग ,
रोशन हुआ करते थे!
वहाँ आज अंधेरों का ,
पहरा रहता है !
पर तेरे आने के एहसास भर ने ,
सदियों से बंद दिल के दरवाजे ,
खोल दिये !
और फिर ये साबित कर दिया ,
कि प्यार में दो जिस्म नहीं,
दो रूहें एक हो जाती है!
सच्चे प्रेमियों के लिये ये पैगाम
छोड जाती है !
प्यार दो जिस्मों का नहीं ,
दो आत्माओं का मिलन होता है--------------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
किस ने दिल के बंद दरवाजे पे ,
हल्के से थाप लगाई .है !
सदियाँ बीत गई,
रोशनी एक किरण तक जहाँ,
न पहुँच पाई .,
तेरे आने के एहसास भर ने वहाँ
एक उम्मीद सी बंधाई .है !
एक थाप ने सदियों से जकडे,
दरवाजों को खोल दिया !
न खुलते तो ,
प्यार की रूसवाई हो जाती !
अजीब है ये, मोहब्बत ,
और उसकी ,
दीवानगी का आलम .!
जिसके होने की आह्ट से ,
सदियों से बंद पडे दरवाजों में,
हलचल सी हो उठी !
शायद हवायें उसका पैगाम
ले आई !
कभी जहाँ मोहब्बत के चिराग ,
रोशन हुआ करते थे!
वहाँ आज अंधेरों का ,
पहरा रहता है !
पर तेरे आने के एहसास भर ने ,
सदियों से बंद दिल के दरवाजे ,
खोल दिये !
और फिर ये साबित कर दिया ,
कि प्यार में दो जिस्म नहीं,
दो रूहें एक हो जाती है!
सच्चे प्रेमियों के लिये ये पैगाम
छोड जाती है !
प्यार दो जिस्मों का नहीं ,
दो आत्माओं का मिलन होता है--------------
...राधा श्रोत्रिय"आशा"
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