सोमवार, 13 अक्टूबर 2014

लम्हाँ

******** लम्हाँ  *******
तुमने हमसे मुँह क्या मोडा,
लगता है,सारी कायनात ही,
हमसे रूठ गयी----
वक़्त का हर लम्हाँ साथ ,  
बिताये,पलों का हिसाब माँगा ,
करता है----
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"

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