बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

दीपावली *

********** दीपावली *********
तुम दिवाली खूब बनाओ,
हँसों खेलो और खिलखिलाओ !
दीपों का ये पर्व है,
रोशनी में नहाया,धरती ,अम्बर है
कोना-कोना प्रकाश से हो रहा है रोशन ,
सबके मन से अंधकार का  हो गमन !
अपनी खुशियों में देखो,
तुम उनको न भुलाना!
रोशनी न हो घर जिनके,
तुम उम्मीद का एक दीया जलाना !
खूब पटाखे और फुलझडी चलाना,
पर किसी मासूम के सपनों को भी,
तुम उमंगों से भर आना !
खील ,बताशे और मिठाई,
खूब जमकर उडाना !
जिनके घर न जला हो चूल्हा,
तुम उनकी भूख भी मिटाना !
"आशा"दीपों का पर्व है
 ये तुम न भूल जाना!
हर घर से मिटा अंधकार ,
तुम इंसान बन जाना !
खिले किसी का बचपन​,मिटे किसी की भूख​,रोशन हो हर घर का आँगन ,सार्थक होगा ये जीवन​!
...राधा श्रोत्रिय​"आशा"
२२-१०-२०१४

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